सफर :
सफर ने कल मुझसे पूछा था...
साथ चलोगे मेरे...
मैंने कहा नहीं...
आज पता नहीं...
कौन से सफर पर हम चल पड़े हैं...
नाही सफर का पता है...
नाही मंजिल का पता है...
एक रह गया अफसोस की...
ना पता चला सफर का...
एक रह गए अफसोस की...
ना पता चला मंजिल का...
पता नहीं...
कहां से निकले थे हम...
और कहां जा रहे हैं हम...
ORIGINAL BY : VAISHALI GEETABEN BINAL
WRITTEN BY : VAISHALI GEETABEN BINAL
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